देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमने वाले अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को शत शत नमन
फरीदाबाद : देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूमने वाले अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु देशवासियों के लिए अनंतकाल तक प्रेरणास्रोत रहेंगे। यह उद्गार आज सेक्टर-16 के जेड पार्क में आयोजित शहीद दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक नरेंद्र गुप्ता ने अमर बलिदानियों के चित्रों पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहे। कार्यक्रम का आयोजन अजरोंदा मंडल अध्यक्ष कुलदीप सिंह साहनी, समीर टंडन व राजन शर्मा युवा भाजपा मंडल द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अरविंद सूद जिला उपाध्यक्ष, रविंद्र मंगला, पंकज रामपाल, भगवान सिंह मंडल प्रभारी, प्रमोद शर्मा, अंकुर सिंह आर्य, समीर टंडन (आईटी प्रमुख), राजन शर्मा युवा मंडल अध्यक्ष, मिश्र देवी पूर्व अध्यक्ष महिला मंडल भाजपा, सुनील कुमार, नवीन पसरिचा, संदीप बंसल, सुरेंद्र सांगा, सर्वजीत सिंह चौहान, अरुण वालिया, सरदार तेजिंद्र चड्ढा, रमेश भारद्वाज, मनोज कपिला, जीवन बेदी, सर्वेश गोयल तथा नंदकिशोर अग्रवाल आदि गणमान्य जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पार्क में खेलने आने वाले बच्चों ने भी बढ़चढक़र भाग लिया।

इस अवसर पर विधायक नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि कहा कि ऐसे अमर शहीदों की वीरगाथाओं को सुनकर युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना का संचार होता है। उन्होंने कहा कृतज्ञ राष्ट्र हमेशा अपने अमर शहीदों को नमन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि सरदार भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की शहादत को देश कभी भुला नहीं सकता, उनके इस बलिदान को देश का प्रत्येक नागरिक भुला नहीं सकता। आज ही के दिन साल 1931 को भारत में ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने में अपना अहम किरदार निभाने वाले तीन महान क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह, अमर शहीद राजगुरु और अमर शहीद सुखदेव को फांसी पर अंग्रेजी हुकूमत द्वारा लटकाया गया था। उनकी याद में हर साल 23 मार्च को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि उनके बलिदान को देश हमेशा याद रखे।
इस अवसर पर कुलदीप सिंह साहनी, समीर टंडन, राजन शर्मा व टोनी पहलवान ने संयुक्त रूप से कहा कि कहा इन शहीदों की याद कर हर देशवासी का सिर हमेशा गर्व से ऊंचा रहेगा। त्रिमूर्ति बलिदानियों को शहीदी दिवस पर कोटि-कोटि नमन। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को शहीदों के सपनों को साकार करना चाहिए और ऐसे शहीदों के पदचिन्हों पर चलते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
